कितना उचित है श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहना?

Go to the profile of Hardik  Lashkari
Hardik Lashkari
Jun 17 , 2019 18 min read 240 Views Likes 2 Comments
कितना उचित है श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहना?

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जय…उस दिन मंदिर में जब लोगों को तुम्हारे जयकारे लगाते सुना तो अचानक मन में एक ख्याल आया…क्या सच में तुमने ऐसे कर्म किये हैं की तुम्हें मर्यादा पुरुषोत्तम की उपाधि से नवाजा जाये? 

...
हाँ, कहने को तुम संसार के सर्वोत्तम धनुर्धारी हो  | भगवान विष्णु के सभी अवतारों में तुम्हें सबसे उत्तम अवतार माना गया है | रामायण और ऐसे अनगिनत धर्म ग्रंथों में तुम्हें इस समूचे विश्व का सबसे निष्ठावान शासक बताया गया है |

मैं इन सब में से किसी बात से जरा भी शंकित नहीं हूँ, परन्तु इसका मतलब ये नहीं की तुम्हें मर्यादा पुरुषोत्तम मान लिया जाए |

तुम श्रेष्ठ राजा हो सकते हो, पर कभी मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं बन सकते, क्यूंकि पुरुषोत्तम वह होता है जो सभी पुरुषों में श्रेष्ठ हो |

जिसने अपनी पत्नी को एक धोबी के कहने पर छोड़ दिया हो, वह कैसे पुरुषोत्तम बन सकता है?

सीता विवाह पूर्व एक राजकुमारी थी, परन्तु तुमसे विवाह करने के बाद पत्नी धर्म निभाने के लिए उन्होंने संसार के सभी सुख सुविधाओं को त्याग दिया और तुम्हारे साथ 14 वर्ष के वनवास में चली गयी |

हाँ, अक्सर बुद्धिजीवी ये कहते हैं की सीता का हरण रावण ने किया ही इसलिए था ताकि तुम्हारे हाथों उसका वध हो और उसे मोक्ष प्राप्त हो |

...
माना की सीता इन सब में एक पात्र मात्र ही थी, पर, हे राम, कभी कल्पना करते सीता के मन में बसे उस भय की, जो उन्होंने हर उस दिन महसूस किया था, जब वो एक राक्षस के राज्य के बगीचे में अकेली रह रहीं थी |

पर तुमने इन सब की परवाह किये बिना सीता का साथ ठीक उस समय छोड़ दिया जब वो गर्भवती थीं |

आज कलयुग में भी एक पुरुष से ये अपेक्षा की जाती है की वह अपनी धर्मपत्नी के साथ हर एक उस पल रहे जब वो 9 महीने तक हर दिन असहनीय पीड़ा झेलती है |

कलयुग में जब तुमने सीता का साथ उनके सबसे मुश्किल समय में न दिया, तो कैसे मान लूँ मैं तुम्हें मर्यादा पुरुषोत्तम?

बताओ राम, कैसे अपेक्षा करूँ की संसार के सभी पुरुष तुम्हें अपना आदर्श मानें?

हे राम, अगर रावण मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं है, तो वो धर्म निभाने में तुमसे कम भी नहीं है |

उस दिन अचानक ही मेरी बहन के मुँह से ये निकल पड़ा, "मैं हमेशा चाहूंगी की मेरा भाई रावण जैसा हो, न की राम जैसा |

क्यूंकि मैंने हमेशा ये सुना था की तुम मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते हो, तो ये सुनना मेरे लिए भी आश्चर्यजनक था |


...

रावण ने जब अपनी बहन का खून भरा चेहरा देखा, तो उसने बिना कुछ सोचे इस संसार के सबसे बड़े योद्धा से बदला लेने का फैसला किया | वो तुम्हारी पत्नी को उठाकर लंका ले गया, पर वहां उसे राज्य के सबसे सुन्दर वन में रहने की जगह दी | असुर प्रजाति का होते हुए भी उसने कभी तुम्हारी पत्नी को हाथ तक नहीं लगाया | 

उसने भी तुम्हारी पत्नी को उठाकर खुद के धर्म का पालन किया तो फिर क्यों वो एक राक्षस है, और क्यों तुम मर्यादा पुरुषोत्तम? माना उसने जो किया, गलत किया, और इसलिए उसका वध हुआ | पर इसका मतलब ये कतई नहीं की तुम्हें मर्यादा पुरुषोत्तम की उपाधि दे दी जाए?


Comments2

More In Personalities

More In Lifestyle

More In Religion

More In Education