अधूरी दास्तान- लता मंगेशकर और राजसिंह डुंगरपुर की अमर प्रेम कहानी क्यो ज़िंदगी भर कुँवारे रहे दोनों

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Sajjanpal Singh
Jun 29 , 2019 34 min read 50 Views Likes 0 Comments
अधूरी दास्तान- लता मंगेशकर  और राजसिंह डुंगरपुर की अमर प्रेम कहानी क्यो ज़िंदगी भर कुँवारे रहे दोनों

 

                           "आ लौट के आजा मेरे मीत तुझे मेरे गीत बुलाते है"

                             "तूने भली रे निभाई प्रीत तुझे मेरे गीत बुलाते है "

 

लता मंगेशकर:-

शायद की कोई एशियाई व्यक्ति हो जो कहता हो की वो लता दीदी को नही जानता या लता के गाने कभी नही सुने हो यहा एशियाई इसलिए लिखा गया है क्योकि भारत देश मे तो ब्च्चा बच्चा लता मंगेशकर से वाकिफ है ओर हो भी क्यो नही???? आजादी बाद जन्मे सभी भारतीय लता मंगेशकर के ही तो गीत देख सुन कर बड़े हुए है आज भले लता दी ने गाना लगभग बंद सा कर दिया हो लेकिन आज की जनरेशन की भी फेवरेट सिंगर कोई है तो वो लता दीदी है आपकी भी हमारी भी लता दीदी की आवाज पाकिस्तान बर्मा नेपाल भूटान से लेकर रूस के शहरो मे भी गूँजती है क्योकि रशियन लोग हमेशा भारतीय फिल्मों के शौकीन रहे है ओर हमारी ही तरह उनकी भी फेवरेट सिंगर लता मंगेशकर ही रही है लता का बचपन अत्यंत गरीबी मे बिता पिता का साया बचपन मे उठ गया ओर 5 भाई बहनो मे लता सबसे बड़ी थी सो घर चलाने की ज़िम्मेदारी भी लता पर आ गयी थी लता बचपन से मशहूर फ़िल्मकार ओर एक्टर के एल सहगल को पसंद किया करती थी ओर ये कहने से भी नहीं हिचकती थी की " जब कभी मे फिल्म इंडस्ट्री मे बड़ी स्टार बनी तो शादी तो सिर्फ K L सहगल से ही करूंगी" लेकिन किस्मत को कुछ ओर मंजूर था

क्योकि बचपन मे खुद लता ने नहीं सोचा होगा की उनका जीवन इस तरह करवट लेगा की वे ज़िंदगी भर शादी ना करने की अटूट कसम ले लेंगी........

 

राज सिंह डुंगरपुर:-

भारतीय क्रिकेट जगत मे राज सिंह डुंगरपुर का कितना बड़ा स्थान है ये पूरे क्रिकेट जगत को भली भांति पता है वे 13 साल तक चयन समिति प्रमुख रहे एव दो बार बीसीसीआई क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रहे उसके अलावा चार बार भारतीय टीम के मुख्य मेनेजर भी रहे

सचिन तेंदुलकर के लिए राजसिंह कितनी बड़ी शख्सियत है वो स्वत सचिन के इंटरव्यू से ही साबित हो जाता है क्योकि मात्र 16 वर्ष की उम्र मे सचिन का पहली बार पाकिस्तान दौरे के लिए चयन करने वाले चयनकर्ता राजसिंह डुंगरपुर ही थे क्योकि चयन समिति के बाकी सदस्य सचिन की कम उम्र का हवाला देकर किसी वरिष्ठ खिलाड़ी को चुनना चाहते थे

दक्षिण राजस्थान के मेवाड़ धरा पर फैली हुई रियासत डुंगरपुर आजादी के वक्त राजा लक्ष्मण सिंह डुंगरपुर रियासत के अंतिम शासक थे वे खुद क्रिकेट के बड़े शौकीन थे ओर उनके तीन बेटो मे सबसे छोटे बेटे राजसिंह मात्र 18 वर्ष की उम्र मे ही 1955 मे राजस्थान की रणजी टीम मे अपना स्थान बना चुके थे ओर लगातार कामयाब होते जा रहे थे राजसिंह ने अपनी एकेडमिक शिक्षा इंदौर के डेली कॉलेज से पूरी की ओर वर्ष 1959 मे लॉं की पढ़ाई हेतु मुंबई चले गए जो उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा

मुंबई मे राजसिंह अपनी बड़ी बहन के पास नेपियर सी रोड स्थित बंगले पर रहते थे जो मलाबार हिल पर था ओर पास ही समुद्र किनारे नरीमन रोड पर बने बेबोर्न स्टेडियम मे क्रिकेट प्रेक्टिस के लिए आते थे क्योकि मुंबई आने के बावजूद राज सिंह ने रणजी खेलना नहीं छोड़ा था ओर यही क्रिकेट के शोकीन हृदयनाथ मंगेशकर(लता के भाई ) भी क्रिकेट खेलने आ जाया करते थे काफी दिनों तक साथ खेलने के बाद दोनों मे दोस्ती बढ़ी ओर जब राजसिंह जी को ये पता लगा की हृदयनाथ लता मंगेशकर के भाई है तो राज सिंह ने उन्हे लता जी से मिलवाने का आग्रह किया क्योकि 50 के दशक के शुरुवात मे स्ट्रगल करने वाली लता 1960 आते आते बॉलीवुड मे काफी नाम कमा चुकी थी ओर उनके गीत एक के बाद एक हिट हुए जा रहे थे और कुछ ही दिनों मे ये मुलाक़ात भी तय हुई एवं राज सिंह जी को लता जी के घर से चाय का न्योता मिला पहली मुलाक़ात के लिए उत्सुक राज सिंह अपने साथ वो टेप रिकॉर्डर भी ले गए जिस पर रोज वे लता जी के गाने सुना करते थे ओर मुलाक़ात के दौरान राज सिंह ने लता को टेप रिकॉर्डर पर वो गीत भी बजा कर सुनाया जो उनका फेवरेट था ओर जिसे सबसे ज्यादा सुना करते थे अनंत पहली बार चाय के साथ शुरू हुई चर्चा आगे कितनी गहरी दोस्ती का रुख अख़्तियार करेगी ये इन दोनों मे से किसी ने नहीं सोचा था दोनों अपने अपने क्षेत्र मे तरक्की पर तरक्की किए जा रहे थे ओर मुलाकातों का दौर भी जारी था कभी लता जी राज सिंह का क्रिकेट मैच देखने ग्राउंड पहुँच जाती तो कभी राज सिंह लता जी के रिकॉर्डिंग स्टुडियो मे उनका इंतजार करते दिखते उस दौर मे टीवी इलेक्ट्रोनिक मीडिया नहीं था लेकिन प्रिंट मीडिया ओर फिल्मी मेगजीन्स मे सबसे चर्चित स्टोरी इन दो की ही रहती थी ओर इनको कभी एतराज भी न हुआ लेकिन इनकी दोस्ती इतनी गहरी हो चुकी थी अखबारो मे शादी की भी चर्चा शुरू होने लगी थी ओर फिर वो दिन भी आया जब लता मंगेशकर ने राज सिंह के सामने शादी का प्रस्ताव भी रख दिया लेकिन.........

लेकिन...... राज सिंह जी ने ये कहते हुए प्रस्ताव को टाल दिया की " मैं अपने पिताजी को दिया हुआ एक वादा निभा रहा हूँ इसलिए चाह कर भी तुमसे शादी नहीं कर सकता लेकिन एक वादा तुमसे भी करता हूँ की अगर तुम नहीं तो ओर कोई भी नहीं अब में किसी ओर से भी शादी नहीं करूंगा "

क्या था पिताजी का वादा:- जब राज सिंह को महराजा लक्ष्मण सिंह ने कॉलेज शिक्षा हेतु इंदौर भेजा तो एक वादा किया था की

 

"तुम डूंगपुर रियासत के राजकुँवर हो ओर इस आधुनिकता की होड मे तुमसे आशा करता हूँ की तुम ऐसा कोई गलत कदम नहीं उठाओगे जिससे राजा लक्ष्मण सिंह या डुंगरपुर रियासत का नाम मिट्टी मे मिल जाये इसलिए तुम भी एक वादा करो की तुम राजपूत लड़की के सिवा किसी भी ओर जाति की लड्की से शादी नहीं करोगे"

राजसिंह ने जीते जी अपने पिताजी के दिये सभी वचन निभाए ओर लता जी को दिया वादा भी निभाया और ताउम्र शादी नहीं की अंतत 12 सितंबर 2009 को मुंबई मे राज सिंह ने अंतिम सांस ली

आज लता दी भी 90 पार कर चुकी है अब अस्वस्थ रहती है लेकिन उन्होने भी जो जिद की थीं राज सिंह जी से ही शादी की जिद उसी जिद पर कायम रही ओर ज़िंदगी भर कुंवारी रही......................


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