Latest opinions about Culture | Opined

Ajay Kumar Sharma
Sep 28, 2020

#चाणक्य_नीति
सत्य के बल से सूर्य तपता है, सत्य के बल से वायु बहती है, सत्य ने ही पृथ्वी को धारण कर रखा है!
सब कुछ #सत्य मे ही स्थित है!
#श्लोक
सत्येन धार्यते पृथिवी सत्येन तपते रवि: !
सत्येन वाति वायुश्च सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम्!!
#culture

Ajay Kumar Sharma
Sep 28, 2020

#मनुस्मृति
पुरुषों को स्वभाव सॆ कुटिल,परनिंदक और बकवादी दूसरों की बुराई करने वाला नही होना चाहिए!
निरर्थक न हाथ पैर हिलाते रहना चाहिए और ना आंखे मटकानी चाहिए!
#श्लोक
न पाणिपादचपलो न नेत्रचपलोअनृजु:!
न स्याद्वाक्चपलश्वैव न परद्रोहकर्मधी:!!
#culture

Ajay Kumar Sharma
Sep 27, 2020

#चाणक्य_नीति
विदेश मे #विद्या पुरुष की मित्र होती है,
घर मे #पत्नी पुरुष की मित्र होती है,
रोगी की मित्र #औषधि है और मर जाने पर उसका मित्र उसका #धर्म होता है!
#श्लोक
विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च!
व्याधितस्यौधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च!!
#culture

Ajay Kumar Sharma
Sep 26, 2020

#चाणक्य_नीति
राष्ट्र द्वारा किये पाप राजा को,राजा के पाप उसके पुरोहित(आजकल पार्टी को),इसी प्रकार स्त्री के किये पाप उसके पति को और शिष्य के किये उसके गुरु को भोगना पडताहै!
#श्लोक
राजा राष्ट्रकृतं पापं भुंक्ते राज्ञ: पापं पुरोहित:!
भर्ता च स्त्रीकृतं पापं शिष्यपापं गुरुस्तथा!!
#culture

Ajay Kumar Sharma
Sep 26, 2020

#मनुस्मृति
पृथ्वीमेबोये बीजसमान,पापी का कियागया पाप,उसी समय नहीफ़लता,पापीको दण्डितनहीकरता,परन्तु समयआनेपर,पाप उसी तरह फ़लताफ़ूलताहैकि पापीकीजडेंही काट डालताहै,उसे जड समेत उखाडफ़ैकताहै!
#श्लोक
नाधर्मश्चरितो लोके सद्य: फ़लति गौरिव!
शनैरावर्त्यमानस्तु कर्तुर्मूलानि कृन्तति!!
#culture

Ajay Kumar Sharma
Sep 26, 2020

#मनुस्मृति
पृथ्वीमेबोये बीजसमान,पापी का कियागया पाप,उसी समय नहीफ़लता,पापीको दण्डितनहीकरता,परन्तु समयआनेपर,पाप उसी तरह फ़लताफ़ूलताहैकि पापीकीजडेंही काट डालताहै,उसे जड समेत उखाडफ़ैकताहै!
#श्लोक
नाधर्मश्चरितो लोके सद्य: फ़लति गौरिव!
शनैरावर्त्यमानस्तु कर्तुर्मूलानि कृन्तति!!
#culture

Ajay Kumar Sharma
Sep 25, 2020

#मनुस्मृति
ज्ञान,आयु,पद,प्रतिष्ठामे ज्येष्ठपुरुषोके पधारने पर,उठकर उन्हे प्रणामकरे,उन्हे बैठनेकास्थान दे,जबतक वे बैठेरहे सम्मानमे खडेरहे,उनके प्रस्थानकरनेपर उनके पीछे कुछदूरचलना चाहिए
#श्लोक
अभिवादयेद्वृध्दांश्च दद्याच्चैवासनं स्वकम्!
कृताञ्जलिरुपासीत गच्छत: पृष्ठतोअन्वियात्!!
#culture

Ajay Kumar Sharma
Sep 25, 2020

#चाणक्य_नीति
ब्रह्मज्ञानियो के लिये स्वर्ग तिनकेकेसमान है! शूरवीर के लिए जीवन तिनकेकेसमान है!
संयमी के लिए स्त्री तिनकेकेसमान है!
निर्लोभी,इच्छारहितकेलिए संसार तिनके के समान है?
#श्लोक
तृणं ब्रह्मविद: स्वर्गस्तृणं शूरस्य जीवितम्!
जिताअशस्य तृणं नारी नि:स्पृहस्य तृणं जगत् !!
#culture

Ajay Kumar Sharma
Sep 24, 2020

#मनुस्मृति
ईश्वर की सत्ता मे विश्वास का अभाव, वेदो की निंदा, देवो (बडे लोग व आप्तवचन) की अवज्ञा, वैर, विरोध, ढौंग, अहंकार, क्रोध, और उग्रता, छोड देने योग्य दोष है !
#श्लोक
नास्तिक्यं वेदनिंदा च देवतानां च कुत्सनम्!
द्वॆषं दम्भं च मानं च क्रोधं तैक्ष्ण्यं च वर्जयेत्!!
#culture

Ajay Kumar Sharma
Sep 24, 2020

#चाणक्य_नीति
भयो से तभी डरना चाहिए जब वह उपस्थित हो!भय के उपस्थित होने पर उस पर प्रहार करना चाहिए और उसे दूर करने का प्रयास करना चाहिए!
#श्लोक
तावद् भयेषु भेतव्यं यावद्भयमनागत् !
आगतं तु भयं दृष्ट्वा प्रहर्तव्यमशंकया!!
#culture

Ajay Kumar Sharma
Sep 23, 2020

#मनुस्मृति
सदाचार का पालन करने दीर्घ आयु, पुत्र-पौत्रादि संतान की तथा अक्षय धन की प्राप्ति होती है! अशुभ लक्षणॊ का नाश होता है!
#श्लोक
आचाराल्लभते ह्यायुराचारादीप्सिता: प्रजा:!
आचाराध्दनमक्षय्यमाचारो हन्त्यललक्षणम् !!
#culture

Ajay Kumar Sharma
Sep 23, 2020

#चाणक्य_नीति
जैसे घिसनॆ,काटने,तपाने और कूटने इन चार प्रकारसे स्वर्ण की परिक्षा की जाती है वैसे ही दान, शील, गूण और आचरण से पुरुष की परिक्षा की जाती है!
#श्लोक
यथा चतुर्भि: कनकं परिक्ष्यते निघर्षणच्छेनतापताडनै:!
तथा चतुर्भि: पुरुष परिक्ष्यते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा!!
#culture